छोटे बच्चो और बड़ो के लिए 101+ Hindi Short Story, हिंदी लघु कहानिया (Short Story ) मजेदार और रोमांच से भरी(Short Story in hindi)

हेलो दोस्तों नमस्कार आज मैं आपके लिए लेकर आया हूं Hindi Short Story ऐसी कहानियां जो बहुत मजेदार होने वाली है, अगर आप भी कहानियों के शौकीन है या आपके घर पर कोई छोटा बच्चा है जिन्हें Short Hindi Story सुनना बहुत पसंद है तो आप यह कहानियां उन्हें सुना सकते है.

दोस्तों यह Hindi Short Story खासकर बच्चों को ध्यान में रखकर लिखी गई है और बड़े ही कमाल के हैं. इन कहानियां के अंत में कहानियों से मिलने वाली सीख(Moral Of The Short Story in hindi) के बारे में भी लिखा गया है. जिनकी मदद से हम छोटे बच्चों का आसानी से जीवन के गूढ़ रहस्य को समझा सकते हैं. तो चले बिना देरी किए Short Story in hindi पढ़ना शुरू करते है.

101+ हिंदी कहानियाँ, बच्चो के लिए Best Moral Story हिंदी (Story with moral in hindi)

दुष्ट हाथी की कहानी(Evil elephant Short story in hindi)

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कुजवन में एक विशाल वृक्ष पर एक सुंदर चिड़िया रहती थी। एक बार उसने तीन अंडे दिए। वह अंडो से बच्चों के बाहर निकलने का इंतजार कर रही थी। उसी समय एक दुष्ट हाथी वहाँ आया। उसे अपनी ताकत का बड़ा घमंड था। उसने पेड़ को तोड़ने के लिए जोर-जोर से हिलाना शुरू किया। वह पेड़ तो नहीं टूटा, लेकिन चिड़िया के अंडे गिरकर फूट गए। चिड़िया बहुत दुखी हुई।

कई दिनों बाद वह अपने मित्र कठफोड़वा से मिली। चिड़िया ने कठफोड़वा को सारी बात बताई। कठफोड़वा ने कहा, “बहन, इस घमंडी हाथी के कारण जंगल के सभी पशु-पक्षी परेशान है। इसको सबक सिखाना अब बहुत जरूरी हो गया है।” कठफोड़वा के दो और मित्र थे, मेढक और मधुमक्खी। सभी ने मिलकर उस घमंडी हाथी को सबक सिखाने की ठान ली।

अगले दिन एक योजना के अनुसार कुछ मधुमक्खियाँ हाथी के कानों में गुनगुनाने लगी। हाथी मदमस्त हो गया उधर मौक देखकर कठफोड़वा ने अपनी नुकीली चोच से हाथी की दोनों आँखो को घायल कर दिया। हाथी को बहुत दर्द हुआ और वह इधर-उधर भागने लगा। मेढक ने इस मौके का लाभ उठाया। वह एक दलदल के पास अपने साथियो के साथ बैठ गया और ‘टर्र-टर्र’ करने लगा। हाथी को लगा कि पास ही तालाब है। वह आवाज की दिशा में भागने लगा। हाथी अंत में जाकर गहरे दलदल में धँस गया और उसकी मौत हो गई।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi)

• घमंडी का अंत बहुत बुरा होता है।

• एकसाथ मिलकर बड़े-से-बड़े दुश्मन को भी हराया जा सकता है.

चतुर खरगोश की कहानी(The Short story of The clever rabbit)

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कुंबजवन में एक खरगोश रहता था। एक दिन खरगोश भोजन की तलाश में घर से दूर निकल गया।

दोपहर को अचानक बिजली चमकी और तूफानी बरसात शुरू हो गई। सारे जीव-जंतु डरकर अपने-अपने घरो की ओर दौड़ने लगे। खरगोश भी किसी तरह अपनी बिल के पास पहुँचा। उसने देखा कि जिस बिल मे वह रहता था, उसके मुँह पर आम का पेड़ गिरा है। उसने बहुत प्रयास किया, लेकिन वह आम के पेड़ को हटा नहीं पाया। एक बैल वहाँ से गुजर रहा था। खरगोश ने बैल से पेड़ हाटने में मदद माँगी। बैल बोला, “मेरे बच्चे घर पर अकेले है। मुझे पहुँचने में देर हुई, तो वे घबरा जाएँगे।” यह कहते हुए बैल वहाँ से चला गया। इसी तरह उसने कई जानवरों से सहायता माँगी, लेकिन तूफान के कारण किसी ने उसकी सहायता नहीं की। खरगोश ने सोचा कि अब बुद्धि से काम लेना होगा। उसी समय एक हाथी वहाँ आया। खरगोश ने उससे कहा, “मैने सुना है कि आप बहुत शक्तिशाली है, फिर इस तरह डरकर क्यो भाग रहे है?” हाथी बोला, “मैं किसी से नहीं डरता। मैं तो बस अपने घर जा रहा हूँ।” खरगोश ने फिर कहा, “बातें बनाना छोड़िए गजराज । यदि आप सचमुच शक्तिशाली हैं, तो इस आम के पेड़ को हिलाकर दिखाइए । ” हाथी ने तुरंत अपनी सूँड़ से उठाकर उस पेड़ को फेंक दिया। खरगोश ने कहा, “मुझे विश्वास हो गया कि आप सचमुच शक्तिशाली है।” हाथी गर्व से अपने रास्ते चल पड़ा और खरगोश अपनी बिल में घुस गया।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi)

• बुद्धि से कोई भी कार्य किया जा सकता है। • दूसरों की मदद करने से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।

दो चूहे की कहानी(Short Story of two rats)

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खेत मे चुन्नू चूहा मजे से अनाज खा रहा था। उसने एक चूहे को अपनी ओर आते देखा। पास आने पर चुन्नू ने उससे पूछा, “भाई, तुम कौन हो और कहाँ से आ रहे हो?” चूहे ने कहा, “मेरा नाम मुन्नू है। मैं शहर से यहाँ घूमने आया हूँ।” चुन्नू ने कहा, “तुम जब तक चाहो यहाँ रह सकते हो।” चुन्नू-मुन्नू ने एकसाथ कई दिन बिताए, फिर एक दिन मुन्नू शहर लौट गया।

कुछ दिनों बाद चुन्नू को शहर देखने और मुन्नू से मिलने की इच्छा हुई। वह एक दिन शहर पहुँच गया। दोनों दोस्त एक-दूसरे को देखकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने ढेर सारी बातें की, फिर भोजन का समय हुआ। मुन्नू घर में बने एक बिल में रहता था। उसने चुन्नू से कहा, “बाहर निकलो मित्र और मेज के नीचे जो भोजन गिरा है, उसका आनंद लो। यह गाँव के भोजन से बहुत अधिक स्वादिष्ट है।” दोनों बिल से निकलकर भोजन करने लगे।

घर में मौजूद बिल्ली ने उन्हें देखा, तो खाने के लिए दौड़ी। उसे देख मुन्नू चिल्लाया, “चुन्नू, तुरंत बिल में लौटो । बिल्ली आ रही है।” चुन्नू लड़खड़ाते हुए बिल में पहुँचा। वह बहुत डर गया। थोड़ी देर बाद दोनों घूमने निकले। घर से बाहर निकलते ही दरवाजे पर खड़े कुत्ते ने उन्हें दौड़ा लिया। दोनों फिर दौड़कर बिल में घुस गए। चुन्नू ने मुन्नू से कहा, “मित्र, गाँव में भले ही इतना स्वादिष्ट भोजन ना हो, लेकिन वहाँ मेरे जीवन को कोई खतरा नहीं है। मुझे अपने घर लौटने की आज्ञा दो।” चुन्नू गाँव लौट आया और फिर कभी शहर नहीं गया।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi) – 

शांति का साधारण जीवन, खतरे से भरे ऐशो-आराम के जीवन से अच्छा होता है, अधिक सुख की चाहत कई बार मुसीबत बन जाती है.

101+ हिंदी कहानियाँ, बच्चो के लिए Best Moral Story हिंदी (Story with moral in hindi)

खरगोश और तोता की कहानी(The Short story of The rabbit and The parrot)

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बहुत समय पहले की बात है। कंचनवन नामक एक विशाल जंगल था। जंगल में कई प्रकार के पशु-पक्षी रहते थे। उसी जंगल में सुंदर नाम का तोता और भानु नाम का खरगोश रहता था। दोनों बहुत अच्छे मित्र है। दोनो हमेशा एक-दूसरे के साथ रहते थे। एक दिन जंगल में एक शिकारी आया। उसकी नजर भानु पर पड़ी। भानु बहुत खूबसूरत था। उसकी खूबसूरती देखकर शिकारी ने निश्चय कर लिया कि वह किसी तरह इस खरगोश को पकड़कर ही दम लेगा। उसने जंगल में जाल बिछा दिया।

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अगले दिन भानु जंगल में घूम रहा था। उसने ध्यान नहीं दिया और वह घास से ढँके एक पिंजरे में फँस गया। भानु बहुत डर गया। वह बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा था। सुंदर उड़ते हुए उस रास्ते से गुजर रहा था। उसने देखा कि एक जानवर पिंजरे में फँसा हुआ था। वह जोर-जोर से “बचाओ-बचाओ” चिल्ला रहा था। सुंदर को वह आवाज जानी-पहचानी लगी। वह नजदीक गया, तो उसने देखा कि भानु पिंजरे में फँसा हुआ था। वह बहुत दुखी था और उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे। सुंदर ने कहा, “मित्र, चिंता मत करो। मैं अभी कुछ करता हूँ।” सुंदर ने पिंजरे को चारों तरफ से ध्यान से देखा । फिर उसकी नजर पिंजरे की कुंडी पर पड़ी। उसने तुरंत कुंडी खोल दी। कुंडी खुलते ही भानु निकल भागा। सुंदर भी उसके पीछे-पीछे उड़ने लगा। काफी दूर आने के बाद दोनों मित्रों ने राहत की साँस ली। भानु ने सुंदर का धन्यवाद करते हुए उसे अपने गले से लगा लिया।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi)

 – सच्चे मित्र-संकट में एक-दूसरे का साथ देते हैं। संकट में घबराना नहीं चाहिए.

जंगल की आग की कहानी(wildfire Short story in hindi)

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चार राहगीर शहर जा रहे थे। रास्ते में एक जंगल पड़ा। शाम हो गई थी, तो वे जंगल मे रुक गए। उनमें से एक ने कहा, “यहीं भोजन करके आराम करते है। फिर कल सुबह यहाँ से आगे बढ़ेगे।” चारो ने भोजन किया और फिर आग जलाकर उसके पास बैठ गए। सुबह हुई और चारों राहगीर वहाँ से चल दिए। जिस स्थान पर राहगीरों ने आग जलाई थी, वहाँ थोड़ी-सी चिंगारी बच गई थी। संयोग से वह चिंगारी हवा के सहारे सूखे पत्तों तक पहुँची और धीरे-धीरे आग बन गई।

एक चिड़िया ने जब यह देखा तो वह डर गई। वह समझ गई कि यदि आग बढ़ गई, तो सारा जंगल जल जाएगा। वह आग बुझाने में जुट गई। चिड़िया जंगल में मौजूद तालाब का पानी अपनी चोंच में भरकर लाती और उस आग पर डाल देती। ऐसा करते हुए उसे एक मोर ने देखा। उसने चिड़िया से कहा, “क्या तुम्हारी चोच के पानी से यह आग बुझ जाएगी?” उसने कहा, “मुझे नहीं पता, लेकिन आग फैल गई, तो हम सभी संकट में फँस जाएँगे।” चिड़िया की बात मोर को ठीक लगी। वह भी पानी ला – लाकर आग बुझाने लगा। उन दोनों को देखकर कई पक्षी और पशु आग बुझाने में जुट गए। आग फैलती जा रही थी। आग की खबर सुनकर कई हाथी वहाँ पहुँच गए। वे अपनी सूँड़ में पानी भरकर आग बुझाने लगे। थोड़ी देर में आग बुझ गई। सभी ने साहसी चिड़िया की दूरदृष्टि की प्रशंसा करते हुए उसका धन्यवाद किया।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi) 

-हमेशा दूरदृष्टि रखनी चाहिए। अच्छा कार्य करते समय अकेले होने की चिंता नहीं करनी चाहिए।

शेर और चूहा की कहानी(The Short story of The lion and The mouse)

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ठंडी का मौसम था। शेर भोजन करके अपनी गुफा के बाहर धूप में लेटा था । लेटे-लेटे उसे नींद आ गई। एक छोटा शरारती चूहा वहाँ आया । वह सोते हुए शेर पर चढ़ गया। चूहा कभी शेर की दाढ़ी के साथ खेलता, तो कभी उसकी पूँछ को हिलाता-डुलाता।

उसकी बदमाशी अधिक हुई, तो शेर की नींद खुल गई | चूहा अपनी मस्ती में शेर के ऊपर खेल-कूद रहा था। शेर ने अपने पंजे में चूहे को पकड़ लिया। पंजे में आते ही चूहा डरकर काँपने लगा। उसने हाथ जोड़कर शेर से कहा, “महाराज, मुझे माफ कर दीजिए।” उसने बहुत विनती की, तो शेर को उस पर दया आ गई। उसने चूहे को छोड़ दिया। जाते हुए चूहे ने कहा, “धन्यवाद महाराज, भविष्य में कभी जरूरत पड़ी, तो मैं आपकी मदद जरूर करूँगा।” इस पर शेर ने हँसते हुए कहा, “चूहे, मुझे किसी की मदद की जरूरत नहीं है। मै जंगल का राजा हूँ।

” कई दिन बीत गए। एक शिकारी जंगल में आया। उसने शेर को पकड़ने के लिए जाल बिछा दिया। अगले दिन शेर जब जंगल में टहलने निकला, तो वह जाल में फँस गया। वह जोर-जोर से दहाड़ने लगा । चूहा वहीं नजदीक ही खेल रहा था। उसने शेर की आवाज सुनी । वह दौड़कर शेर के पास पहुँचा। उसने कहा, “महाराज, आप चिंता ना करें। मैं अभी आपको इस जाल से छुड़ाता हूँ।” चूहे ने अपने नुकीले दाँतों से जाल को काट दिया। शेर आजाद हो गया। उस दिन से दोनों मित्र बन गए।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi)

 -• किसी को परेशान करना गलत बात है। किसी को स्वयं से छोटा नहीं समझना चाहिए।

101+ हिंदी कहानियाँ, बच्चो के लिए Best Moral Story हिंदी (Story with moral in hindi)

सच्चे मित्र की कहानी(True friend Short story hindi)

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बहुत समय पहले की बात है। एक नदी के किनारे पीपल का पेड़ था। उस पेड़ पर एक कबूतर रहता था। गर्मी का मौसम था। एक चोटी पानी पीने नदी के किनारे पहुँची। वह पानी पी रही थी। उसका पैर फिसल गया और वह नदी में डूबने लगी। कबूतर पेड़ पर बैठा यह सबकुछ देख रहा था। चीटी की सहायता के लिए कबूतर ने एक पत्ता तोड़कर नदी में गिरा दिया। चीटी उस पत्ते पर बैठ गई। पत्ता बहते हुए नदी के किनारे पहुँच गया।

नदी के किनारे पहुँचकर चीटी ने कबूतर से कहा, “कबूतर भाई, बहुत बहुत धन्यवाद। आज आपके कारण मेरी जान बची है। कभी आवश्यकता पड़ी, तो मै भी आपकी सहायता जरूर करूंगी।” चीटी की बाते सुनकर कबूतर ने मन में सोचा, “यह छोटी चीटी मेरी क्या मदद करेगी?” चीटी प्रतिदिन पानी पीने नदी के किनारे आती और कबूतर से जरूर मिलती। दोनों आपस में काफी बाते करते। धीरे-धीरे दोनों अच्छे मित्र बन गए।

कुछ दिनों बाद एक शिकारी वहाँ आया। उसने दूर से देखा कि पेड़ के ऊपर कबूतर बैठा है। उसने कबूतर पर निशाना लगाया। उसी समय चीटी की नजर उस शिकारी पर पड़ी। वह पानी पीने के लिए नदी की तरफ जा रही थी वह समझ गई कि आज उसके मित्र की जान संकट में है। उसने तुंरत दौड़कर शिकारी के पैर में जोर से काट लिया शिकारी का निशाना चूक गया और कबूतर की जान बच गई।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi)

 – सच्चे मित्र संकट में एक-दूसरे का साथ निभाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर कोई छोटा या बड़ा नहीं होता.

राजा और हिरन की कहानी(The Short story of The king and The deer)

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अगदपुर नामक एक राज्य था। उसके राजा का नाम शिवकुमार था। उसे शिकार करना बहुत पसंद था। एक बार वह शिकार करने जंगल में गया। सुबह से दोपहर तक भटकने के बाद भी उसे कोई शिकार नहीं मिला। शिवकुमार और उसके सैनिक थक चुके थे। उसने थोड़ी देर आराम करने का निर्णय लिया।

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शिवकुमार बैठकर आराम कर रहा था। उसी समय उसने दूर झाड़ियों के पास से जा रहे हिरन को देखा वह सैनिकों के साथ उसका पीछा करने लगा। हिरन बहुत तेज था। हिरन का पीछा करते-करते शिवकुमार बहुत दूर निकल आया था। उसके सिपाही बहुत पीछे छूट गए थे। बीच जंगल में पहुँचकर हिरन जैसे गायब हो गया शिवकुमार को लगा कि हिरन झाड़ियों के पीछे छुप गया है। वह झाड़ियों के पास पहुँचा। जैसे ही उसने एक और कदम बढ़ाया, वह दलदल में जा धँसा। वह जोर-जोर से सहायता के लिए पुकारने लगा, लेकिन दूर-दूर तक उसको सहायता करनेवाला कोई नहीं था। उसे लगा कि आज उसकी मौत निश्चित है।

उसी समय वह हिरन राजा के सामने आया। उसने अपनी सींग शिवकुमार की ओर झुका दी। शिवकुमार उसकी सीग के सहारे दलदल से बाहर आ गया। दलदल से बाहर निकलने पर शिवकुमार ने हिरन को गले से लगा लिया। उसके सिपाही तब तक वहाँ पहुँच गए। शिवकुमार ने सारी कहानी अपने सिपाहियों को बताई। उसी दिन उसने जानवरों के शिकार पर रोक लगा दी।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi) 

– बेजुबान जानवरों का शिकार करना पाप है संकट में फंसे जीव की सहायता करना बहुत बड़ा पुण्य है.

101+ हिंदी कहानियाँ, बच्चो के लिए Best Moral Story हिंदी (Story with moral in hindi)

जंगली सूअर और शेर की कहानी(Short story of wild boar and lion)

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गर्मी का मौसम था। एक जंगली सूअर पानी पीने तालाब पर पहुँचा। उसी समय एक शेर भी वहाँ आ गया। सूअर ने शेर पर ध्यान नहीं दिया और वह पानी पीता रहा। शेर को लगा कि सूअर उसका अपमान कर रहा है। उसने सूअर से कहा, “मेरे आने बाद भी तुमने पानी पीना बंद नहीं किया। तुमने मेरा अपमान किया है।” सूअर को भी अपनी शक्ति पर बहुत घमंड था। उसने जवाब दिया, “मैं तुम्हे अपना राजा नहीं मानता, इसलिए तुम मुझे पानी पीने से नहीं रोक सकते हो।”

सूअर की कड़वी बाते सुनकर शेर का गुस्सा बढ़ गया । वह सूअर पर झपट पड़ा। सूअर भी तैयार था। दोनों में लड़ाई शुरू हो गई। कुछ गिद्ध आराम से उनकी लड़ाई देख रहे थे। उनमें से एक गिद्ध ने कहा, “भाई, इस लड़ाई में जीत चाहे जिसकी हो, लेकिन भोजन तो हम सभी को मिलेगा।”

लड़ाई बहुत देर तक चली। उसी बीच शेर ने पेड़ पर बैठे गिद्धों को देखा। उसे समझने में देर नहीं लगी कि वे लड़ाई के परिणाम का इंतजार कर रहे थे। शेर ने लड़ना बंद कर दिया। उसने सूअर से कहा, “हम दोनों की लड़ाई में लाभ इनका ही होगा। ये गिद्ध हम दोनों में से किसी एक की मौत का इंतजार कर रहे है । अतः हमें लड़ना बंद कर देना चाहिए।” सूअर को शेर की बात सही लगी। दोनों ने लड़ाई बंद कर दोस्ती कर ली। उधर गिद्धों ने जब यह देखा, तो निराश होकर वहाँ से चले गए।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi)-

लड़ाई करने से केवल हानि होती है। • आपसी लड़ाई का लाभ दूसरे उठाते हैं।

काला बतख की कहानी(The Short story of The black duck)

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एक विशाल तालाब था। उसमें बतख का एक जोड़ा रहता था। बतख की जंगल के सभी जीव-जत्आ और पशु-पक्षियों से अच्छो मित्रता थी। पूरे जंगल में बतख का यह एकमात्र जोड़ा था, इसलिए सभी उन्हें पसंद भी करते थे। कुछ समय बाद बतख ने तीन अंडे दिए। तीनो अंडो से तीन बच्चे पैदा हुए। दो बच्चे तो सफेद और बहुत सुंदर थे, लेकिन एक का रंग काला था। सभी जीव-जंतु बतख के दोनों बच्चों की सुदरता की बहुत प्रशंसा करते थे, लेकिन काले बतख के बारे में कोई कुछ नहीं कहता था।

समय के साथ बतख के बच्चे थोड़े बड़े हो गए। बतख के दोनों बच्चे घमंडी और गुस्सैल थे, लेकिन काला बतख बहुत शांत और समझदार था। काला बतख सभी के साथ प्रेम से रहता था, जबकि अन्य दो बतख सभी से लड़ते-झगड़ते रहते थे।

गर्मी का मौसम था। एक चीटा तालाब के किनारे पानी पी रहा था। अचानक उसका पैर फिसल गया और वह पानी में डूबने लगा। चीटे ने तालाब में खेल रहे बतख के दोनों बच्चों से सहायता माँगी, लेकिन उन्होंने उसकी सहायता नहीं की। तभी काला बतख वहाँ घूमते हुए आया। जब उसने चीटे को डूबते हुए देखा, तो वह उसे बचाने लगा। उसने चौटे को अपने ऊपर बिठाकर तालाब के किनारे पहुँचा दिया। चीटे ने काले बतख का। धन्यवाद किया और चला गया। चीटे को बचाने की कहानी जल्द ही पूरे जंगल में फैल गई और काला बतख पूरे जंगल में प्रसिद्ध हो गया।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi) 

– हमेशा मिल-जलकर रहना चाहिए। शारीरिक सुंदरता से से अधिक महत्वपूर्ण कर्म है.

दुष्ट भेड़िया और सारस, की कहानी(The Short story of The evil wolf and The stork)

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कंदपवन में एक दुष्ट और लालची भेड़िया रहता था। एक दिन शिकार करने के बाद वह जल्दी जल्दी उसे खा रहा था। खाते-खाते एक हड्डी उसके गले में फँस गई। उसने हड्डी को निकालने की बहुत कोशिश की, लेकिन

वह सफल नहीं हुआ। हड्डी अटक जाने के कारण अब वह कुछ खा-पी नहीं सकता था। वह बहुत परेशान हो गया। गले में हड्डी लिए वह जंगल में घूमने लगा। उसने कई जानवरों से मदद माँगी, लेकिन किसी ने भी उसकी मदद नहीं की। वह एक सारस के पास पहुँचा। लंबी चोच देखकर भेड़िया समझ गया कि केवल सारस ही उसकी सहायता कर सकता है। भेड़िए को देखकर सारस डरकर भागने लगा। भेड़िए ने उसे रोका और कहा, “सारस भाई, मै तुम्हे कोई हानि नहीं पहुँचाऊँगा। मुझे तुम्हारी मदद चाहिए । ” सारस ने डरते हुए पूछा, “कैसी मदद?” भेड़िए ने सारस को सारी बात बता दी। उसने सारस से कहा, “यदि तुम मेरी मदद करते हो, तो मै तुम्हे इनाम भी दूंगा।” सारस को भेड़िए पर दया आ गई। उसने अपनी लंबी चोच भेड़िए के मुँह में डालकर हड्डी निकाल दी।

** हड्डी निकल जाने के बाद भेड़िए को बहुत आराम मिला। वह जब जाने लगा, तो सारस ने कहा, ” आपने कहा था कि मुझे इनाम देंगे, तो मेरा इनाम कहाँ है?” भेड़िया हँसते हुए बोला, “मेरे मुँह मे अपनी चोच डालने के बाद भी तुम जीवित हो, यही तुम्हारा सबसे बड़ा इनाम है।” सारस दुखी होकर वहाँ से उड़ गया।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi)

 -लालच परेशानी का कारण है। अपना वादा हमेशा निभाना चाहिए।

शेर और गुलाम की कहानी(The Short story of The lion and The slave)

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मंगलपुर नामक एक राज्य था। उसका राजा अधमसिंह बहुत बुरा था। उसके अत्याचारों से तंग आकर एक दिन सुमंत नामक एक गुलाम महल से भाग निकला। भागते-भागते वह एक जंगल में पहुँचा। वहाँ सुमंत ने एक घायल शेर को देखा। उसके पैर में बड़ा-सा काँट चुभ गया था। दर्द के कारण वह ठीक से चल नहीं पा रहा था। उसके पैर से खून भी निकल रहा था। सुमंत को उस शेर पर दया आ गई। वह हिम्मत करके शेर के पास गया। उसने शेर के पजे से काँटा निकाल दिया। काँटा निकलते ही शेर को आराम मिल गया। वह खुशी से सुमत को अपनी जीभ से चाटने लगा। थोड़ी देर बाद दोनों अपने अपने रास्ते चले गए।

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सैनिकों ने कुछ दिनों बाद सुमंत को पकड़ लिया। राजा ने सुमंत को भूखे शेर के आगे फेकने का आदेश दिया। अगले दिन सारो प्रजा मैदान में इकट्ठा हुई। सुमंत को शेर के सामने फेंक दिया गया। राजा दूर अपने सिंहासन पर बैठा सबकुछ देख रहा था। सुमंत बहुत डरा हुआ था, लेकिन उसके पास पहुँचकर शेर ने उसके हाथ को चाटना शुरू कर दिया। सुमंत भी उसे पहचान गया। उसने शेर को गले से लगा लिया। वह वही शेर था, जिसका काँटा सुमंत ने निकाला था। सारी प्रजा यह देखकर चकित हो गई। दूसरे ही पल शेर मौका पाकर राजा के ऊपर झपटा। उसने राजा को मार डाला। दुष्ट राजा से मुक्ति पाकर सारी प्रजा सुमत की जय-जयकार करने लगी। सुमंत को उस राज्य का नया राजा बना दिया गया।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi) 

– सभी जीवों की मदद करनी चाहिए दूसरों को दुख देने का परिणाम हमेशा बुरा होता है.

समझदार कछुआ की कहानी(Short story of The wise tortoise in hindi)

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किसी जंगल मे कछुआ, हाथी और बंदर रहते थे। तीनों बहुत अच्छे मित्र थे। एक दिन हाथी और बंदर में छिड़ गई। दोनों स्वयं को एक-दूसरे से अधिक श्रेष्ठ बता रहे थे। समझदार कछुए को एक युक्ति सूझी। उसने कहा, “तुम दोनों में से जो भी मेरी बताई प्रतियोगिता में जीतेगा, वही श्रेष्ठ होगा।” हाथी और बंदर ने एक साथ पूछा, “कैसी प्रतियोगिता?” कछुए ने कहा, “कल तुम दोनों को नदी पार कर उस किनारे जाना होगा। जो पेड़ को बिना नुकसान पहुँचाए आम लाएगा, वही जीतेगा।”

बंदर को यह चिंता थी कि वह नदी कैसे पार करेगा? उधर हाथी इस चिंता में था कि उसकी सूँड़ आम के फलों तक नही पहुँचेगी। अगले दिन प्रतियोगिता शुरू हुई। हाथी तैरकर नदी पार करने लगा। बंदर कूदकर हाथी की पीठ पर बैठ गया। उसने हाथी से नदी पार कराने की विनती की। हाथी को दया आ गई। उसने बंदर को नदी पार करा दिया।

नदी किनारे पहुँचकर बंदर पेड़ पर चढ़ गया और उसने एक आम तोड़ लिया। उधर हाथी की सूँड़ आम तक नहीं पहुँच रही थी। उसने बंदर से मदद माँगी। बंदर ने झट से एक आम तोड़कर हाथी को दे दिया। दोनों नदी पार कर कछुए के पास पहुँचे। कछुए ने पूछा, “क्या तुम दोनों ने प्रतियोगिता में एक-दूसरे की मदद ली?” दोनों ने एकसाथ जवाब दिया, “हाँ।” कछुआ हँसकर बोला, “इसका मतलब तुम दोनों में कोई छोटा या बड़ा नहीं है। तुम दोनो एकसमान हो।” हाथी और बंदर ने फिर दोस्ती कर ली।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi) 

-कोई छोटा या बड़ा नहीं होता है। एक-दूसरे की मदद करके ही सफलता प्राप्त की जा सकती है।

निराश बंदर की कहानी(The Short story of The dejected monkey hindi)

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किसी जंगल में बंदर का एक जोड़ा रहता था। उनका नाम राजा और रानी था। दोनों को एक बच्चा हुआ। माता-पिता ने बड़े प्यार से उसका नाम गोलू रखा। धीरे-धीरे गोलू बड़ा हो गया और उसकी शिक्षा का समय आया। माता-पिता के अधिक प्यार के चलते गोलू आलसी हो गया था। राजा-रानी जब उसे कुछ सिखाते, तो उसका मन उसमें नहीं लगता था। इसी कारण कई बार उसे डाँट भी सुननी पड़ती थी। यदि कभी वह कोशिश भी करता, तो उसमें असफल हो जाता। वह बंदरों की तरह ना ही पेड़ों पर दौड़कर चढ़ पाता और ना ही लंबी-लंबी छलाँग लगा पाता था। राजा-रानी को गोलू के भविष्य की चिंता सताने लगी।

अपने माता-पिता को परेशान देखकर गोलू घर छोड़कर भाग गया। गोलू बहुत दूर एक गुफा में पहुँचा। उसने देखा कि एक छोटी-सी चींटी अपनी पीठ पर दाने का टुकड़ा लेकर दीवार पर चढ़ रही थी। वह बार-बार थोड़ा ऊपर तक चढ़ती और फिर गिर पड़ती थी। चीटी ने हार नहीं मानी। कई बार गिरने के बाद अंत में वह दाना लेकर दीवार पर चढ़ने में सफल हो गई। यह देखकर गोलू ने सोचा, “यदि एक छोटी-सी चींटी प्रयास करने से सफल हो सकती है, तो मैं क्यों नहीं?”

उसने जंगल में रहकर कड़ी मेहनत की। कुछ दिनों बाद वह तेजी से पेड़ पर चढ़ना, छलाँग लगाना और कुछ सीख(Moral Of The Short Story in hindi) गया। इसके बाद वह अपने घर लौटा। माता-पिता अपने बेटे गोलू की सफलता देखकर बहुत प्रसन्न हुए

सीख(Moral Of The Short Story in hindi)- 

कोशिश करने से सफलता मिलती है। • आलस करना बुरी बात है

कौवे का दुख की कहानी(Short sad story of crows in hindi)

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बहुत दूर किसी जंगल में एक काला कौआ रहता था। वह अपने काले रंग से बहुत चिढ़ता था। एक दिन वह पेड़ पर बैठा था। उसने देखा कि तालाब में बतख तैर रहा है। वह उसके पास जाता है और कहता है, “बतख भाई, तुम्हारा यह सफेद रंग कितना सुंदर है। तुम तो अपने रंग से बहुत खुश होगे।” बतख ने उत्तर दिया, “अरे भाई, तोते के पास मुझसे अधिक रंग है। सबसे अधिक खुश तो वह होगा।” बतख की बात कौवे को सही लगी। वह तोते के पास पहुँचा। उसने तोते से कहा, “तोता भाई, तुम तो बहुत सुंदर दिखते हो। तुम अपने रंग से बहुत खुश होगे।” तोते ने उत्तर दिया, “अरे भाई, मोर के पास सबसे अधिक रंग हैं। मुझसे अधिक खुश तो वह है । “

तोते की बात सुनकर कौआ चिड़ियाघर में पहुँचा | मोर एक पिंजरे में कैद था। लोग उसके साथ फोटो खिचवा रहे थे। भीड़ खत्म हुई, तो वह मोर के पास गया। उसने कहा, “मोर भाई, इस संसार में तुमसे अधिक सुंदर पक्षी कोई नहीं है।” मोर ने जवाब दिया, “भाई, मै सुंदर तो हूँ, लेकिन सबसे अधिक दुखी भी हूँ।” मोर का जवाब सुनकर कौआ चकित रह गया। उसने पूछा, “ऐसा क्यों कह रहे हो?” मोर ने जवाब दिया, “कौआ भाई, अपनी सुंदरता के कारण ही मैं इस पिंजरे में कैद हूँ। मुझसे अधिक सुखी तो तुम हो, क्योंकि तुम स्वतंत्र हो ।” कौआ अपने घर लौटा आया। वह स्वतंत्रता का महत्त्व समझ गया था, इसलिए वह फिर कभी अपने रंग से दुखी नहीं हुआ।

सीख(Moral Of The Short Story in hindi) 

– स्वतंत्रता सबसे बड़ा सुख है दूसरों को देखकर परेशान नहीं होना चाहिए.

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